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दिल्ली विश्वविद्यालय के अन्तर्गत स्थापित हिन्दी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय ने ज्ञान-विज्ञान के विभिन्न विषयों में हिन्दी में उत्कृष्ट पुस्तकों के प्रकाशन की गौरवशाली परम्परा का निर्वहन करते हुए अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। सम्पूर्ण देश में उच्चस्तरीय पुस्तकों के प्रकाशन की दृष्टि से इसकी अपनी एक विशिष्ट पहचान है।

भारत में हिन्दी माध्यम से उच्चशिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की भारी संख्या है लेकिन विडम्बना यह है कि हिन्दी में ज्ञान-विज्ञान की सामग्री का नितांत अभाव है। निदेशालय इस अभाव की पूर्ति करता है। निदेशालय से प्रकाशित इतिहास, राजनीति विज्ञान, शिक्षा, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र आदि विषयों की पुस्तकें छात्रों में अत्यन्त लोकप्रिय हैं। लोकप्रियता का कारण छात्रों को सुविख्यात विद्वानों द्वारा लिखी पुस्तकों को कम मूल्य में उपलब्ध करवाना है। आज भी यह निदेशालय लेखन के उत्कृष्ट मानदण्डों का निर्वाह करते हुए छात्रोपयोगी पुस्तकों के प्रकाशन के लिए प्रतिबद्ध है। 

निदेशालय के लिए यह गर्व की बात है कि इसके ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण अवदान को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देश के सभी केन्द्रीय विश्वविद्यालयों को दिल्ली विश्वविद्यालय की तरह हिन्दी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय की स्थापना के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं।